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श्री ब्रह्मा आरती — भगवान ब्रह्मा

श्री ब्रह्मा आरती

Dedicated to भगवान ब्रह्माहिन्दी (Hindi)

॥ श्री ॥

॥ श्री ब्रह्मा जी की आरती ॥

आरती श्री ब्रह्मा जी की, चतुर्मुख स्वामी।
जय जय ब्रह्मा देव जी, सृष्टि के नामी॥

भावार्थ: सृष्टि के रचयिता चतुर्मुख ब्रह्मा जी की आरती। हे सृष्टि के प्रसिद्ध देव ब्रह्मा जी, आपकी जय हो।


चार मुख चार वेद पढ़ते, हाथ में कमण्डल।
पद्मासन पर विराजते, शोभा अति मंगल॥

भावार्थ: चार मुखों से चार वेदों का पाठ करते हैं, हाथ में कमण्डल धारण किए हैं। पद्मासन पर विराजमान हैं, आपकी शोभा अत्यंत मंगलकारी है।


सावित्री संग विराजते, हंस वाहन धारी।
सृष्टि रचना तुम्हीं से, जग पालनहारी॥

भावार्थ: देवी सावित्री के साथ विराजमान हैं और हंस को अपना वाहन बनाया है। सम्पूर्ण सृष्टि की रचना आपसे ही हुई है, आप ही जगत के पालनहार हैं।


पुष्कर तीर्थ विराजते, ब्रह्मा जी का धाम।
भक्त जन दर्शन करें, पावें सुख आराम॥

भावार्थ: पुष्कर तीर्थ में ब्रह्मा जी का धाम है। भक्तजन दर्शन करके सुख और शांति प्राप्त करते हैं।


जो कोई ब्रह्मा जी की आरती, नित गावे प्रतिदिन।
ताके सब काज सँवारे, दुःख हरे क्षण क्षिन॥

भावार्थ: जो कोई प्रतिदिन नियमपूर्वक ब्रह्मा जी की आरती गाता है, उसके सभी कार्य सिद्ध होते हैं और सारे दुःख क्षण भर में दूर हो जाते हैं।


॥ इति श्री ब्रह्मा जी की आरती सम्पूर्ण ॥

॥ इति श्री शुभम् ॥