॥ श्री राधा आरती ॥
आरती श्री राधा जी की, श्री राधा जी की।
कुंज बिहारी की स्वामिनी, जय श्री राधा जी की॥
भावार्थ: श्री राधा जी की आरती करो। कुंज बिहारी श्री कृष्ण की स्वामिनी, श्री राधा जी की जय हो!
वृषभानु की नंदिनी, बरसाने की रानी।
किशोरी जू विराजें सदा, अद्भुत छवि बानी॥
आरती श्री राधा जी की…
भावार्थ: राजा वृषभानु की पुत्री, बरसाना की रानी। किशोरी जी सदा विराजमान हैं, उनकी छवि और वाणी अद्भुत है।
कमल नयन मृगनैनी, सुंदर रूप सुहावे।
मुकुट मणि शीश सोहे, कुंडल छवि छावे॥
आरती श्री राधा जी की…
भावार्थ: कमल के समान नेत्र, मृग जैसी सुंदर आँखें, सुंदर रूप मन को भाता है। शीश पर मणियों का मुकुट शोभित है और कानों में कुंडल की छवि छाई हुई है।
श्री कृष्ण प्रियतमा राधा, प्रेम रस की खानी।
रास विलास में शोभित, गोपिन में रानी॥
आरती श्री राधा जी की…
भावार्थ: श्री कृष्ण की प्रियतमा राधा प्रेम रस की खान हैं। रासलीला में शोभित, गोपियों में वे रानी हैं।
भक्तन पर कृपा कीजे, मैया कृपा निधानी।
जो कोई राधा गुण गावे, पावे पद निर्वानी॥
आरती श्री राधा जी की…
भावार्थ: हे कृपा की निधान माँ, भक्तों पर कृपा कीजिए। जो कोई राधा जी के गुण गाता है, वह मोक्ष पद को प्राप्त करता है।


