॥ श्री सरस्वती आरती ॥
ॐ जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता।
सद्गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥
ॐ जय सरस्वती माता…
भावार्थ: हे सरस्वती माता, आपकी जय हो! आप सद्गुणों और वैभव से परिपूर्ण हैं तथा तीनों लोकों में विख्यात हैं।
चंद्रवदनी पद्मासनी, द्युतिमंत शरीरा।
ज्ञान विमल परमानंदी, क्लेश दूर करीरा॥
ॐ जय सरस्वती माता…
भावार्थ: आपका मुखमंडल चंद्रमा के समान सुंदर है, आप कमलासन पर विराजमान हैं और आपका शरीर दीप्तिमान है। आप विमल ज्ञान और परमानंद प्रदान करती हैं तथा सभी क्लेशों को दूर करती हैं।
कामधेनु सी कामना, विद्या दान कीजे।
गीत संगीत अति रसमयी, सुर तरंग दीजे॥
ॐ जय सरस्वती माता…
भावार्थ: हे माता, कामधेनु के समान हमारी कामनाएँ पूर्ण करते हुए विद्या का दान दीजिए। आपकी गीत-संगीत से परिपूर्ण रसमयी सुर तरंग हमें प्रदान कीजिए।
कठिन अविद्या को हरो, हे ज्ञानदायिनी।
तुम बिन सूना सूना सब, तुम हो सुखदायिनी॥
ॐ जय सरस्वती माता…
भावार्थ: हे ज्ञानदायिनी माता, कठिन अविद्या (अज्ञान) को दूर कीजिए। आपके बिना सब कुछ सूना-सूना है, आप ही सुख प्रदान करने वाली हैं।
बुद्धि बल विद्या देहु, मोहि हरहु कलेश।
ज्ञान चक्षु दीजे माता, करो अज्ञान नाश॥
ॐ जय सरस्वती माता…
भावार्थ: हे माता, मुझे बुद्धि, बल और विद्या प्रदान कीजिए तथा मेरे क्लेशों को दूर कीजिए। ज्ञान की दृष्टि दीजिए और अज्ञान का नाश कीजिए।
श्री सरस्वती की आरती, जो कोई नर गावे।
हितकारी सुखकारी, मनवांछित फल पावे॥
ॐ जय सरस्वती माता…
भावार्थ: जो मनुष्य श्री सरस्वती माता की यह आरती गाता है, उसका हित और सुख होता है तथा वह मनवांछित फल प्राप्त करता है।


