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श्री सूर्य देव आरती — भगवान सूर्य

श्री सूर्य देव आरती

Dedicated to भगवान सूर्यहिन्दी (Hindi)

॥ श्री ॥

॥ आरती ॥

ॐ जय सूर्य भगवान, प्रभु जय सूर्य भगवान।
तुम बिन जगत अंधेरा, कोई न पहचान॥

भावार्थ: हे सूर्य भगवान, आपकी जय हो! आपके बिना यह संसार अंधकारमय है और कोई किसी को पहचान नहीं सकता।


सप्त अश्व रथ राजे, अरुण है सारथी।
कुण्डल मकर शोभित, कान्ति अपरम्पार ही।
ॐ जय सूर्य भगवान, प्रभु जय सूर्य भगवान।
तुम बिन जगत अंधेरा, कोई न पहचान॥

भावार्थ: आपके रथ में सात अश्व जुते हैं और अरुण आपके सारथी हैं। आपके कानों में मकर कुण्डल शोभायमान हैं और आपकी कान्ति अपरम्पार है।


द्वादश रूप धारण किये, नवग्रह के स्वामी।
कष्ट निवारक दुख हरो, हे अन्तर्यामी।
ॐ जय सूर्य भगवान, प्रभु जय सूर्य भगवान।
तुम बिन जगत अंधेरा, कोई न पहचान॥

भावार्थ: आप द्वादश (बारह) रूप धारण करते हैं और नवग्रहों के स्वामी हैं। हे अन्तर्यामी, हमारे कष्टों का निवारण कीजिए और दुखों को हरिए।


सूरजमुखी फूल तव, आगे नित फूले।
जो जन तुमको ध्यावे, रोग शोक सब भूले।
ॐ जय सूर्य भगवान, प्रभु जय सूर्य भगवान।
तुम बिन जगत अंधेरा, कोई न पहचान॥

भावार्थ: सूरजमुखी के फूल सदा आपके सम्मुख खिलते हैं। जो मनुष्य आपका ध्यान करता है, उसके सभी रोग और शोक दूर हो जाते हैं।


आरती जो कोई गावे, सुमिरन नित ध्यावे।
ताको सदा सुख सम्पत्ति, लाभ वो पावे।
ॐ जय सूर्य भगवान, प्रभु जय सूर्य भगवान।
तुम बिन जगत अंधेरा, कोई न पहचान॥

भावार्थ: जो व्यक्ति आपकी आरती गाता है और प्रतिदिन आपका सुमिरन करता है, वह सदा सुख, सम्पत्ति और लाभ प्राप्त करता है।

॥ इति श्री शुभम् ॥