॥ श्री तुलसी आरती ॥
जय तुलसी माता, मैया जय तुलसी माता।
भक्तन की रक्षक, तुम विश्व विख्याता॥
जय तुलसी माता…
भावार्थ: हे तुलसी माता, आपकी जय हो! हे माँ, आपकी जय हो। आप भक्तों की रक्षा करने वाली हैं और संपूर्ण विश्व में विख्यात हैं।
नन्दकुँवर की प्यारी, तुम श्याम दुलारी।
हरि चरणन की सेवा, सदा तुम्हारी॥
जय तुलसी माता…
भावार्थ: आप नन्दकुमार (श्री कृष्ण) की प्यारी और श्याम की दुलारी हैं। भगवान हरि के चरणों की सेवा सदा आपकी रहती है।
विष्णुप्रिया तुम तुलसी, अमृत की बानी।
सकल सृष्टि तारिणी, पुण्य निदानी॥
जय तुलसी माता…
भावार्थ: हे तुलसी, आप भगवान विष्णु की प्रिय हैं और आपकी वाणी अमृत के समान है। आप सम्पूर्ण सृष्टि को तारने वाली और पुण्य की निधान हैं।
जल सींचे जो नित्य, श्री तुलसी माता।
सकल मनोरथ पूरे, सुखदायी विधाता॥
जय तुलसी माता…
भावार्थ: जो प्रतिदिन श्री तुलसी माता को जल चढ़ाता है, उसके सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं और सुख देने वाला विधाता प्रसन्न होता है।
शालिग्राम संग विवाह, कार्तिक में होई।
दीपदान जो करे, सुखी सदा सोई॥
जय तुलसी माता…
भावार्थ: कार्तिक मास में शालिग्राम (विष्णु स्वरूप) के संग तुलसी विवाह होता है। जो दीपदान करता है, वह सदा सुखी रहता है।


