॥ श्री ॥
॥ दोहा ॥ जय जय चतुरानन ब्रह्मा, सृष्टिकर्ता सुख धाम। हंस वाहिनी संग शारदा, करहु प्रणाम निष्काम॥
॥ चौपाई ॥
जय चतुर्मुख वेद विधाता। सकल जगत के जन्म प्रदाता॥
कमलासन विराजे स्वामी। सत्यलोक के अन्तर्यामी॥
॥ इति श्री शुभम् ॥

॥ दोहा ॥ जय जय चतुरानन ब्रह्मा, सृष्टिकर्ता सुख धाम। हंस वाहिनी संग शारदा, करहु प्रणाम निष्काम॥
जय चतुर्मुख वेद विधाता। सकल जगत के जन्म प्रदाता॥
कमलासन विराजे स्वामी। सत्यलोक के अन्तर्यामी॥