॥ श्री ॥
॥ दोहा ॥ चण्ड मुण्ड संहारिणी, चामुण्डा कल्यान। सिंह वाहिनी कृपा करि, कीजै अभय प्रदान॥
॥ चौपाई ॥
जय चामुण्डा जय कल्याणी। असुर विनाशनि जग महारानी॥
त्रिशूल खड्ग हस्त विराजे। जय जयकार भुवन में गाजे॥
॥ इति श्री शुभम् ॥

॥ दोहा ॥ चण्ड मुण्ड संहारिणी, चामुण्डा कल्यान। सिंह वाहिनी कृपा करि, कीजै अभय प्रदान॥
जय चामुण्डा जय कल्याणी। असुर विनाशनि जग महारानी॥
त्रिशूल खड्ग हस्त विराजे। जय जयकार भुवन में गाजे॥