॥ श्री ॥
॥ दोहा ॥ शिव नन्दन मंगल सदन, सेनापति सुख धाम। तारक मर्दन की कृपा, करहु कृपा निष्काम॥
॥ चौपाई ॥
जय जय कार्तिकेय भगवान। षडानन मयूर वाहन महान॥
शक्ति बाण कर सोहे प्यारा। सुर हित हेतु असुर संहारा॥
॥ इति श्री शुभम् ॥

॥ दोहा ॥ शिव नन्दन मंगल सदन, सेनापति सुख धाम। तारक मर्दन की कृपा, करहु कृपा निष्काम॥
जय जय कार्तिकेय भगवान। षडानन मयूर वाहन महान॥
शक्ति बाण कर सोहे प्यारा। सुर हित हेतु असुर संहारा॥