॥ श्री ॥
॥ दोहा ॥ जयति ललिता त्रिपुरसुन्दरी, राजराजेश्वरी मात। श्रीचक्र वासिनी करुणामयी, पूरहु मन की बात॥
॥ चौपाई ॥
जय जय श्री ललिता परमेश्वरी। कामेश्वर संग राजराजेश्वरी॥
अमृत सागर मणिवीथि वासी। भव बन्धन हरणी सुख रासी॥
॥ इति श्री शुभम् ॥

॥ दोहा ॥ जयति ललिता त्रिपुरसुन्दरी, राजराजेश्वरी मात। श्रीचक्र वासिनी करुणामयी, पूरहु मन की बात॥
जय जय श्री ललिता परमेश्वरी। कामेश्वर संग राजराजेश्वरी॥
अमृत सागर मणिवीथि वासी। भव बन्धन हरणी सुख रासी॥