॥ श्री ॥
॥ दोहा ॥ जय शिरडी के साईं नाथ, दीन बंधु दयाल। सबका मालिक एक कहि, कीन्हा सबहिं निहाल॥
॥ चौपाई ॥
जय जय साईं सद्गुरु स्वामी। घट घट वासी अन्तर्यामी॥
श्रद्धा सबुरी मंत्र सिखाया। सबका कल्याण कराया॥
॥ इति श्री शुभम् ॥

॥ दोहा ॥ जय शिरडी के साईं नाथ, दीन बंधु दयाल। सबका मालिक एक कहि, कीन्हा सबहिं निहाल॥
जय जय साईं सद्गुरु स्वामी। घट घट वासी अन्तर्यामी॥
श्रद्धा सबुरी मंत्र सिखाया। सबका कल्याण कराया॥