॥ श्री ॥
॥ दोहा ॥ जय जय संतोषी माता, सुख शांति प्रदात्री। गणेश सुता कृपा करो, मंगल करनि दात्री॥
॥ चौपाई ॥
जय संतोषी मातु दुलारी। भक्तों की तुम काज संवारी॥
शुक्रवार व्रत जो नर नारी। करैं भाव से होय सुखारी॥
॥ इति श्री शुभम् ॥

॥ दोहा ॥ जय जय संतोषी माता, सुख शांति प्रदात्री। गणेश सुता कृपा करो, मंगल करनि दात्री॥
जय संतोषी मातु दुलारी। भक्तों की तुम काज संवारी॥
शुक्रवार व्रत जो नर नारी। करैं भाव से होय सुखारी॥