॥ श्री ॥
॥ दोहा ॥ जय जय तुलसी महारानी, विष्णुपिया सुखदाय। हरहु रोग अरु क्लेश सब, शरण पड़े जो आय॥
॥ चौपाई ॥
नमो नमो तुलसी कल्याणी। पावन हरि वल्लभा बखानी॥
जो जल सींचै नित्य सबेरे। ताके पाप मिटैं बहुतेरे॥
॥ इति श्री शुभम् ॥

॥ दोहा ॥ जय जय तुलसी महारानी, विष्णुपिया सुखदाय। हरहु रोग अरु क्लेश सब, शरण पड़े जो आय॥
नमो नमो तुलसी कल्याणी। पावन हरि वल्लभा बखानी॥
जो जल सींचै नित्य सबेरे। ताके पाप मिटैं बहुतेरे॥