॥ श्री शिवकवचम् ॥
स्कन्द पुराण के ब्रह्मोत्तर खण्ड में महर्षि ऋषभ द्वारा राजकुमार भद्रायु को दिया गया परम तेजस्वी कवच।
प्रमुख ध्यान श्लोक
नमो नमस्तेऽस्तु सदाशिवाय विश्वरूपाय महेश्वराय।
त्रिनेत्राय पिनाकहस्ताय शशिशेखराय नमो नमः॥
भावार्थ: सर्वव्यापी विश्वरूप महेश्वर, त्रिनेत्रधारी, हाथों में पिनाक धनुष धारण करने वाले और मस्तक पर चंद्रमा को सजाने वाले देवाधिदेव सदाशिव को मेरा बारंबार नमन है।
अंग-रक्षा प्रार्थना
पायाद् भवो मामभितः पुरास्तात्
स्थाणुर्महेशोऽपि च दक्षिणाशाम्।
प्रतीच्यामुग्रः पशुपत्युदीच्यां
पायाद् विभुश्चोर्ध्वमथापि चेशः॥
भावार्थ: भगवान भव पूर्व दिशा में मेरी रक्षा करें, स्थाणु महेश्वर दक्षिण दिशा में रक्षा करें, पश्चिम में भगवान उग्र, उत्तर में पशुपति और ऊर्ध्व दिशा में सर्वव्यापी भगवान ईशान मेरी सब ओर से रक्षा करें।
फलश्रुति
शिव कवच का पाठ करने वाले साधक को अकाल मृत्यु, दुर्घटना, भयंकर व्याधि और विषैले जंतुओं का भय नहीं रहता। यह मोक्ष प्रदायक और समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाला है।


