॥ श्री ॥
॥ श्री शिव पूजन एवं रुद्राभिषेक विधि ॥
शिवलिंग पर जलाभिषेक एवं बिल्वपत्र अर्पण करने की सरल एवं शास्त्रीय विधि।
आवश्यक पूजन सामग्री
- पारद, स्फटिक, पाषाण या पार्थिव (मिट्टी का) शिवलिंग
- तांबे की अरघा/थाली
- अभिषेक सामग्री: गंगाजल, गाय का कच्चा दूध, दही, शहद, घी, शक्कर (पंचामृत)
- भस्म (विभूति), श्वेत चंदन, अक्षत (बिना टूटे हुए चावल)
- अति प्रिय वस्तुएं: तीन पत्तों वाले अखंड बेलपत्र, शमी पत्र, धतूरा, भांग, मंदार (आक) के पुष्प
- जनेऊ, कलावा, धूप, शुद्ध घी का दीपक, कपूर
क्रमबद्ध पूजन विधि
- दिशा व आसन: उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। शिवलिंग की जलाधारी का मुख भी उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
- जलाभिषेक: तांबे के लोटे से गंगाजल मिश्रित शुद्ध जल की पतली धार चढ़ाते हुए निरंतर ॐ नमः शिवाय का जप करें।
- पंचामृत अभिषेक: दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बारी-बारी से अभिषेक कराएं। अंत में पुनः शुद्ध गंगाजल से स्नान कराएं।
- त्रिपुण्ड्र व चंदन: शिवलिंग पर अनामिका, मध्यमा और तर्जनी अंगुली से भस्म या श्वेत चंदन का पावन त्रिपुंड लगाएं।
- बिल्वपत्र अर्पण: चिकने भाग की ओर से शिवलिंग पर बेलपत्र उलटा चढ़ाएं। चढ़ाते समय कहें: त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रियायुधम्। त्रिजन्मपापसंहारं एकबिल्वं शिवार्पणम्॥
- धतूरा व पुष्प: धतूरा, शमी पत्र और मंदार के फूल अर्पित करें।
- भोग व आरती: ऋतुफल या मिष्ठान्न का भोग लगाएं और कपूर से आरती करें। ध्यान रहे, शिवजी की परिक्रमा हमेशा आधी (अर्ध-परिक्रमा) की जाती है, सोमसूत्र को लांघा नहीं जाता।
॥ इति श्री शुभम् ॥


