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Ayodhya Ram Mandir — Chalisa Ghar
श्री साईं बाबा आरती — साईं बाबा

श्री साईं बाबा आरती

Dedicated to साईं बाबाहिन्दी (Hindi)

॥ श्री ॥

॥ श्री साईं बाबा आरती ॥

आरती साईं बाबा, सौख्यदातारा जीवा।
चरणरजतली द्यावा, दासां विसावा, भक्तां विसावा॥
आरती साईं बाबा…

भावार्थ: हे साईं बाबा, आपकी आरती करते हैं। आप जीवों को सुख देने वाले हैं। अपने चरणों की धूलि दीजिए, दासों को विश्राम दीजिए, भक्तों को विश्राम दीजिए।


जाळुनियां अनंग, स्वस्वरूपी राहे दंग।
मुमुक्षुजनां दावी, निजडोळां श्रीरंग॥
आरती साईं बाबा…

भावार्थ: कामदेव को जलाकर भस्म कर आप अपने स्वरूप में ही मग्न रहते हैं। मुमुक्षु (मोक्ष की कामना करने वाले) जनों को आपने अपनी आँखों से श्रीरंग (भगवान) के दर्शन कराए।


जया मनी जैसा भाव, तया तैसा अनुभव।
दावीसी घे ऐसा जीव, लागे हृदयीं सद्भाव॥
आरती साईं बाबा…

भावार्थ: जिसके मन में जैसा भाव होता है, उसे वैसा ही अनुभव होता है। हे साईं, इस प्रकार जीव को दर्शन देकर उसके हृदय में सद्भाव जगाइए।


अबीर गुलाल उधळित, राजे रंगत सोहळा।
भक्तिसाठी अक्षय, ठेवा उदार केला॥
आरती साईं बाबा…

भावार्थ: अबीर और गुलाल उड़ रहा है, रंगों का सुंदर उत्सव शोभायमान है। भक्ति के लिए आपने अक्षय (अविनाशी) कोष उदारता से खोल दिया है।


साईं रूप धरा उदारा, भक्तां हेतु कारणा।
जन्ममरणातें सोडवी, दत्त दिगंबरा कारणा॥
आरती साईं बाबा…

भावार्थ: साईं ने उदार रूप धारण किया, भक्तों के कल्याण हेतु। जन्म-मृत्यु के बंधन से छुड़ाने वाले दत्त दिगंबर ही इसके कारण हैं।


श्री साईं की आरती, जो कोई नित गावे।
सद्गुरु साईं चरणों में, अपना शीश नवावे॥
आरती साईं बाबा…

भावार्थ: जो व्यक्ति प्रतिदिन श्री साईं बाबा की यह आरती गाता है और सद्गुरु साईं के चरणों में अपना शीश नवाता है, उसके सभी कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।

॥ इति श्री शुभम् ॥