॥ श्री बिल्वाष्टकम् ॥
भगवान शिव पर एक बेलपत्र अर्पित करने का असीम पुण्य बतलाने वाला पावन स्तोत्र।
श्लोक १
त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रियायुधम्।
त्रिजन्मपापसंहारमेकबिल्वं शिवार्पणम्॥ १॥
भावार्थ: तीन दलों (पत्तियों) से युक्त, सत्व-रज-तम तीनों गुणों के स्वरूप, शिव के तीन नेत्रों और त्रिशूल के समान तथा तीन जन्मों के पापों का संहार करने वाला एक पावन बेलपत्र मैं भगवान शिव को अर्पित करता हूँ।
श्लोक २
त्रिशाखैः बिल्यपत्रैश्च ह्यच्छिद्रैः कोमलैः शुभैः।
तव पूजां करिष्यामि ह्येकबिल्वं शिवार्पणम्॥ २॥
भावार्थ: हे महादेव! तीन शाखाओं वाले, बिना किसी छिद्र के, कोमल और अत्यंत शुभ बेलपत्रों से मैं आपकी पूजा करता हूँ। यह एक बेलपत्र आपको सादर अर्पित है।
श्लोक ८
दन्तिकोटिसहस्राणां वाजपेयशतस्य च।
कोटिकन्यामहादानमेकबिल्वं शिवार्पणम्॥ ८॥
भावार्थ: करोड़ों हाथियों के दान, सैकड़ों वाजपेय यज्ञों के अनुष्ठान और करोड़ों कन्यादान का जो महान फल होता है, वह फल भगवान शिव पर केवल एक अखंड बेलपत्र अर्पित करने से प्राप्त हो जाता है।
फलश्रुति
बिल्वाष्टक का पाठ करते हुए शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने से शिवलोक की प्राप्ति होती है और समस्त पापों से मुक्ति मिलती है।


