॥ श्री ॥
॥ जय जय हे जगदम्बे माता ॥
जय जय हे जगदम्बे माता, जय दुर्गे दुर्गति परिहारिणी।
महिषासुर-मर्दिनी कल्याणी, भयहारी भवतारिणी॥
पद १
सिंह वाहिनी अष्टभुजा माँ, खड्ग-त्रिशूल-धारिणी।
दुष्ट-दलनी भक्त-प्रतिपालक, असुर-वंश संहारिणी॥
रक्तबीज और चण्ड-मुण्ड को, क्षण में मार गिराया।
देव-लोक को संकट-मुक्त कर, जग में धर्म बचाया॥
पद २
लाल चुनरिया लाल ही चोला, कुमकुम भाल विराजे।
चरण-कमल में शीश झुकाते, झन-झन पायल बाजे॥
हम दीनों की सुध लो माता, दया की दृष्टि कीजो।
सच्ची भक्ति और सद्बुद्धि, का हमको वर दीजो॥
जय जय हे जगदम्बे माता, जय दुर्गे दुर्गति परिहारिणी॥
भावार्थ
यह भजन माँ भगवती जगदम्बा की असीम शक्ति और वात्सल्य का गुणगान करता है। माता दुर्गा दुर्गति का नाश करने वाली और सभी भक्तों को निर्भयता प्रदान करने वाली हैं।
॥ इति श्री शुभम् ॥


