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Ayodhya Ram Mandir — Chalisa Ghar
मंगल भवन अमंगल हारी - राम भजन — प्रभु श्री राम

मंगल भवन अमंगल हारी - राम भजन

Dedicated to प्रभु श्री रामहिन्दी (Hindi)

॥ श्री ॥

॥ मंगल भवन अमंगल हारी ॥

श्री रामचरितमानस से पावन चौपाइयां


मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी॥
दीन दयाल बिरिदु संभारी। हरहु नाथ मम संकट भारी॥


प्रमुख चौपाइयां

होइहि सोइ जो राम रचि राखा। को करि तर्क बढ़ावै साखा॥
रामहि केवल प्रेमु पिआरा। जानि लेउ जो जाननिहारा॥

कलयुग केवल नाम अधारा। सुमिरि सुमिरि नर उतरहिं पारा॥
राम कथा सुंदर कर तारी। संसय बिहग उड़ावनिहारी॥


सम्पूर्ण भावार्थ

जो समस्त मंगलों के धाम हैं और सब अमंगलों का हरण करने वाले हैं, वे अयोध्या नरेश दशरथ जी के आंगन में विहार करने वाले प्रभु श्री रामचंद्र जी मुझ पर द्रवित होकर कृपा करें।

हे दीनों पर दया करने वाले प्रभु! आपका तो स्वभाव ही दीनों का उद्धार करना है। आप मेरे भारी संकटों और कष्टों का हरण कर लीजिए। इस संसार में वही होता है जो प्रभु श्री राम ने रच रखा है, व्यर्थ के तर्कों से क्या लाभ? प्रभु को केवल सच्चा निष्कपट प्रेम ही प्रिय है।

॥ इति श्री शुभम् ॥