॥ अच्युतं केशवं कृष्ण दामोदरं ॥
अच्युतं केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी वल्लभम्।
कौन कहता है भगवान आते नहीं, तुम मीरा के जैसे बुलाते नहीं॥
पद १
अच्युतं केशवं सत्यभामाधवं, माधवं श्रीधरं राधिकामार्धितम्।
कौन कहता है भगवान खाते नहीं, बेर शबरी के जैसे खिलाते नहीं॥
अच्युतं केशवं कृष्ण दामोदरं…
पद २
कौन कहता है भगवान सोते नहीं, यशोदा के जैसे सुलाते नहीं।
कौन कहता है भगवान नाचते नहीं, गोपियों की तरह तुम नचाते नहीं॥
अच्युतं केशवं कृष्ण दामोदरं…
पद ३
नाम जपने से सब काम बन जाएंगे, मन के मंदिर में गिरधर गोपाल आएंगे।
दीन-दुखियों के संकट मिटाने को वो, दौड़े-दौड़े शरण में चले आएंगे॥
अच्युतं केशवं कृष्ण दामोदरं…
भावार्थ
यह भजन सिखाता है कि भगवान किसी बाह्य आडंबर के भूखे नहीं हैं। वे केवल सच्चे प्रेम और समर्पण के वशीभूत हैं। यदि भक्त में मीरा जैसी अनन्य लगन, शबरी जैसा सरल भाव और यशोदा जैसा वात्सल्य हो, तो प्रभु साक्षात प्रकट होते हैं।


