॥ श्री ॥
॥ रघुपति राघव राजा राम ॥
रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीताराम।
सीताराम सीताराम, भज प्यारे तू सीताराम॥
पद १
सुंदर विग्रह मेघश्याम, गंगा तुलसी शालिग्राम।
भद्रमूर्ते सीताराम, जानकी कांता सीताराम॥
रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीताराम॥
पद २
राम नाम जप सुख की खान, मिटे कलेश मिले सम्मान।
कौशल्या के नंदन राम, जन-जन के मन-मंदिर राम॥
रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीताराम॥
भावार्थ
रघुकुल के मुकुटमणि, मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम और माता जानकी पतितों को भी पावन करने वाले हैं। उनका नाम ही संसार के समस्त सुखों की खान और दुःखों का नाश करने वाला है।
॥ इति श्री शुभम् ॥


