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Ayodhya Ram Mandir — Chalisa Ghar
श्री कृष्ण जन्माष्टमी जन्मोत्सव — भगवान श्री कृष्ण

श्री कृष्ण जन्माष्टमी जन्मोत्सव

Dedicated to भगवान श्री कृष्णहिन्दी (Hindi)

॥ श्री ॥

॥ श्री कृष्ण जन्माष्टमी जन्मोत्सव ॥

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र की आधी रात को कारागार में भगवान श्रीकृष्ण का साक्षात अवतरण।


अवतार की पावन कथा

मथुरा के अत्याचारी राजा कंस के पापों का घड़ा जब भर गया, तब आकाशवाणी हुई कि देवकी का आठवां पुत्र कंस का काल बनेगा। कंस ने अपनी बहन देवकी और वासुदेव जी को कारागार में बंद कर दिया और उनके सात बालकों का वध कर दिया।

भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की आधी रात को घोर अंधकार और मूसलाधार वर्षा के बीच भगवान विष्णु चतुर्भुज रूप में प्रकट हुए और बाल रूप धारण किया। योगमाया के प्रभाव से पहरेदार सो गए, बेड़ियां स्वतः खुल गईं और वासुदेव जी नवजात कान्हा को यमुना पार कराकर गोकुल में नंदबाबा और यशोदा मैया के पास सुरक्षित पहुंचा आए।


पूजन विधि व व्रत

दिन भर उपवास रखकर रात्रि ठीक १२ बजे खीरे से बालकृष्ण का जन्म (नाल छेदन) कराया जाता है। दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक कर नए वस्त्र पहनाए जाते हैं और झूले में झुलाया जाता है। माखन-मिश्री और धनिए की पंजीरी का भोग लगाकर व्रत खोला जाता है।

॥ इति श्री शुभम् ॥