॥ माता की जय - पावन जगराता भेंट ॥
माता की जय, माता की जय।
दुर्गा माता की जय॥
पद १
तू ही जगत की माँ है अम्बे, तू ही करती सबका काम।
माता रानी तेरा दरबार, तुझको शत-शत बार प्रणाम॥
माता की जय, माता की जय…
पद २
नौ रूपों में तू है माता, नवदुर्गा तेरा पावन नाम।
सिंह सवारी करने वाली, पूरण करती सबके काम॥
हाथों में त्रिशूल विराजे, खड्ग चक्र धनुष बाण।
दुष्टों का संहार तू करती, भक्तों का करती कल्याण॥
माता की जय, माता की जय…
पद ३
ऊँचे पर्वतों पे तेरा डेरा, भवन निराला सोहे।
लाल चुनरिया लाल ध्वजा माँ, भक्तों का मन मोहे॥
जो भी दर पे शीश झुकाए, खाली हाथ न जाए।
सच्चे मन से जो भी ध्याए, मुँह मांगा वर पाए॥
माता की जय, माता की जय…
भावार्थ
यह भेंट नवरात्रि के जागरण और माता की चौकी में गाई जाने वाली अत्यंत लोकप्रिय स्तुति है। इसमें माता के नौ रूपों, अस्त्र-शस्त्रों और भक्तों पर उनकी अहैतुकी कृपा का सरल एवं हृदयस्पर्शी वर्णन है।


