॥ श्री ॥
॥ माँ दुर्गा के सिद्ध मंत्र ॥
१. सर्वमंगल मांगल्ये मंत्र
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
२. नवार्ण महामंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
सर्वमंगल मांगल्ये श्लोक का भावार्थ
हे नारायणी! आप समस्त मंगलों का भी मंगल करने वाली हैं। आप परम कल्याणमयी, समस्त पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली, शरणागतवत्सला, त्रिनेत्रा और गौर वर्ण वाली देवी हैं। हम आपको बारंबार नमस्कार करते हैं।
नवार्ण मंत्र का बीजाक्षर रहस्य
- ऐं: माँ सरस्वती का बीज (ज्ञान, विद्या ও विवेक)
- ह्रीं: माँ महालक्ष्मी का बीज (ऐश्वर्य, धन ও सामर्थ्य)
- क्लीं: माँ महाकाली का बीज (आकर्षण, बल ও शत्रु विजय)
- चामुण्डायै: चण्ड और मुण्ड रूपी दुर्गुणों का नाश करने वाली पराशक्ति
- विच्चे: सम्यक ज्ञान व मुक्ति प्रदान करने वाली
जप विधि एवं अनुष्ठान
- काल: नवरात्रि, मंगलवार या शुक्रवार को लाल वस्त्र धारण कर पूर्व की ओर बैठें।
- भोग: लाल गुड़हल के पुष्प, धूप, दीप और मिष्ठान्न अर्पित करें।
- माला: रुद्राक्ष या स्फटिक की माला से नित्य जप करें।
फलश्रुति
- समस्त संकटों, विपत्तियों, तंत्र-बाधाओं और शत्रुओं से अचूक रक्षा।
- घर में सुख, ऐश्वर्य, समृद्धि और आरोग्य की निरंतर वृद्धि।
॥ इति श्री शुभम् ॥


