॥ श्री ॥
॥ श्री गणेश महामंत्र ॥
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
बीज मंत्र:
ॐ गं गणपतये नमः
संपूर्ण भावार्थ
हे घुमावदार सूंड वाले, विशालकाय शरीर वाले और करोड़ों सूर्यों के समान दिव्य तेज से युक्त प्रथम पूज्य भगवान गणेश! आप सदा कृपा करके मेरे समस्त शुभ कार्यों को बिना किसी विघ्न-बाधा के निर्विघ्न रूप से पूर्ण करें।
जप विधि एवं महत्व
भगवान गणेश बुद्धि के विधाता और विघ्नहर्ता हैं। किसी भी नए कार्य, व्यापार, गृह प्रवेश या धार्मिक अनुष्ठान के प्रारंभ में गणेश जी का स्मरण अनिवार्य है।
- दिन: बुधवार के दिन दुर्वा दल (दूब घास) और मोदक/लड्डू अर्पित करके १०८ बार जप करें।
- लाभ: कार्यों में आने वाली रुकावटें समाप्त होती हैं, बुद्धि व व्यापार में उन्नति होती है।
॥ इति श्री शुभम् ॥


