॥ श्री ॥
॥ श्री हनुमान महामंत्र ॥
मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥
बीज मंत्र:
ॐ हं हनुमते नमः
संपूर्ण भावार्थ
जो मन के समान तीव्र गति वाले और वायु के सदृश वेगवान हैं, जिन्होंने अपनी सभी इंद्रियों को पूर्णतः वश में कर लिया है, जो बुद्धिमानों में सर्वश्रेष्ठ हैं, पवनपुत्र, वानर सेना के प्रमुख और प्रभु श्री रामचंद्र जी के परम दूत हैं—उन श्री हनुमान जी के चरणों में मैं शरण लेता हूँ।
जप विधि एवं लाभ
- दिन: मंगलवार और शनिवार को सिंदूर, चमेली का तेल और लाल पुष्प अर्पित कर जप करें।
- लाभ: भूत-पिशाच, नकारात्मक शक्तियों और भय का समूल नाश होता है। आत्मविश्वास और शारीरिक बल में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
॥ इति श्री शुभम् ॥


