॥ श्री ॥
॥ श्री महालक्ष्मी महामंत्र ॥
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै अस्मांक दारिद्र्य नाशय प्रचुर धन देहि देहि क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ
लघु बीज मंत्र:
ॐ श्रीं श्रियै नमः
संपूर्ण भावार्थ
हे तीनों लोकों की स्वामिनी, परम ऐश्वर्यमयी माँ महालक्ष्मी! आप हमारे समस्त प्रकार के अभाव, दरिद्रता और संकटों का नाश करें तथा हमें प्रचुर धन-धान्य, समृद्धि, कीर्ति और शांति प्रदान करें।
जप विधि एवं साधना
- माला: कमलगट्टे (कमल के बीज) या स्फटिक की माला से जप करना सर्वोत्तम है।
- दिन: शुक्रवार को स्वच्छ सफेद या गुलाबी वस्त्र पहनकर सुगंधित धूप-दीप के साथ जप करें।
- लाभ: ऋण मुक्ति होती है, व्यवसाय में लाभ होता है और घर में सुख-समृद्धि का चिरस्थायी वास होता है।
॥ इति श्री शुभम् ॥


