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ॐ नमो नारायणाय - अष्टाक्षर महामंत्र — भगवान विष्णु

ॐ नमो नारायणाय - अष्टाक्षर महामंत्र

Dedicated to भगवान विष्णुहिन्दी (Hindi)

॥ श्री ॥

॥ ॐ नमो नारायणाय ॥

ॐ नमो नारायणाय


अष्टाक्षर का दिव्य रहस्य

यह वैष्णव परंपरा का सर्वोपरि अष्टाक्षर महामंत्र (आठ अक्षरों वाला मंत्र) है:

  1. (प्रणव - १ अक्षर)
  2. न-मो (नमः - २ अक्षर)
  3. ना-रा-य-णा-य (नारायणाय - ५ अक्षर)

‘नारायण’ का अर्थ है:

  • नार = जल एवं समस्त जीवों का समूह
  • अयन = जिसका आश्रय या निवास स्थान हो।
    अर्थात जो समस्त सृष्टि के आधार हैं और जिनके भीतर यह सम्पूर्ण ब्रह्मांड स्थित है, वे ही भगवान श्रीमन नारायण हैं।

संपूर्ण भावार्थ

समस्त जगत के पालनकर्ता, क्षीरसागर निवासी, करुणा के सागर सर्वव्यापी श्रीमन नारायण को मेरा बारंबार नमस्कार है।

यह मंत्र जीव को संसार रूपी भवसागर से पार कराकर वैकुंठ धाम की प्राप्ति कराता है। महर्षि वेदव्यास ने कहा है कि कलयुग में भगवान नारायण का नाम ही एकमात्र भवतारक है।


जप की विधि

  • आसन: तुलसी की माला से पीत वस्त्र धारण कर उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  • भोग: भगवान को तुलसी पत्र, पीले पुष्प और नैवेद्य अर्पित करें।
  • काल: प्रातःकाल और संध्याकाल में एकाग्र मन से जप करें।

दिव्य लाभ

  • मोक्ष की प्राप्ति: जीवन के अंत में परमपद वैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है।
  • सुख-शांति व ऐश्वर्य: घर-परिवार में कलह समाप्त होती है तथा सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है।
  • सद्गुणों का विकास: मन से लोभ, मोह और तामसिक प्रवृत्तियों का अंत होता है।
॥ इति श्री शुभम् ॥