॥ श्री ॥
॥ श्री राम तारक मंत्र ॥
श्री राम जय राम जय जय राम
मंत्र का आध्यात्मिक स्वरूप
यह चौदह अक्षरों का पावन तारक मंत्र है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में लिखा है: कलयुग केवल नाम अधारा। सुमिरि सुमिरि नर उतरहिं पारा॥
- श्री: पराशक्ति माता सीता का स्वरूप, जो ऐश्वर्य और भक्ति की दात्री हैं।
- राम: ‘रा’ बीज अग्नि तत्व (पाप भस्म करने वाला) और ‘म’ बीज अमृत तत्व (शांति व तृप्ति देने वाला) है।
- जय: प्रभु की अमोघ विजय और कृपा का उद्घोष।
संपूर्ण भावार्थ
माँ जानकी सहित मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री रामचंद्र जी की सदा जय हो, जय हो, सर्वत्र जय हो!
भगवान शिव स्वयं काशी में देहांत के समय जीवों को यही ‘राम’ नाम रूपी तारक मंत्र देकर मुक्त करते हैं।
जप विधि एवं लाभ
- अति सरल: इस मंत्र के जप के लिए किसी विशेष कर्मकांड की आवश्यकता नहीं है; उठते, बैठते, चलते-फिरते कभी भी इसका स्मरण किया जा सकता है।
- तुलसी माला: नित्य १०८ बार जप करने से मन निर्मल होता है।
- लाभ: भय, संकट, रोग और बाधाओं का नाश होता है तथा जीवन में मर्यादा, धैर्य व शांति की प्रतिष्ठा होती है।
॥ इति श्री शुभम् ॥


