॥ श्री गणेश षोडशोपचार पूजन विधि ॥
घर पर प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश की शास्त्रीय विधि से पूजा करने की सम्पूर्ण मार्गदर्शिका।
कब करें गणेश पूजा?
- नित्य पूजा: प्रतिदिन प्रातः किसी भी नए कार्य के प्रारंभ से पूर्व।
- बुधवार: भगवान गणेश का पावन साप्ताहिक दिवस।
- संकष्टी एवं विनायक चतुर्थी: प्रत्येक माह के कृष्ण व शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि।
- गणेश जन्मोत्सव (गणेश चतुर्थी): भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी।
आवश्यक पूजन सामग्री
- श्री गणेश जी की प्रतिमा या चित्र
- चौकी, लाल वस्त्र, रोली, कुमकुम, अक्षत (अखंड चावल)
- दूर्वा (दूब घास): २१ दूर्वा के गुच्छे (अति प्रिय)
- भोग: मोदक या बेसन के लड्डू
- पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल)
- लाल पुष्प (गुड़हल/गेंदा), जनेऊ, सुपारी, लौंग, इलायची
- शुद्ध घी का दीपक, धूपबत्ती, कपूर
चरणबद्ध षोडशोपचार पूजा विधि
१. पवित्रीकरण व आचमन
हाथ में गंगाजल लेकर अपने ऊपर व सामग्री पर छिड़कें:
ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥
तीन बार आचमन करें: ॐ केशवाय नमः, ॐ माधवाय नमः, ॐ नारायणाय नमः।
२. दीप प्रज्वलन व संकल्प
दीपक जलाएं। दाहिने हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर संकल्प लें कि मैं अपने समस्त विघ्नों के नाश एवं सुख-समृद्धि हेतु श्री गणेश जी का पूजन कर रहा हूँ।
३. ध्यान एवं आवाहन
भगवान गणेश के स्वरूप का ध्यान करें:
गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम्। उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम्॥
प्रतिमा पर अक्षत छोड़कर कहें: ॐ भूर्भुवः स्वः सिद्धिबुद्धिसहिताय श्रीगणपतये नमः, गणपतिम् आवाहयामि स्थापयामि।
४. स्नान एवं पंचामृत
जल, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से स्नान कराएं। तत्पश्चात शुद्ध वस्त्र व जनेऊ अर्पित करें।
५. चंदन, सिंदूर एवं दूर्वा अर्पण
भगवान को लाल चंदन व सिंदूर का तिलक लगाएं। २१ दूर्वा दल अर्पित करते हुए कहें:
ॐ गं गणपतये नमः दुर्वाङ्कुरान् समर्पयामि।
६. नैवेद्य (भोग)
मोदक और लड्डू का भोग लगाएं। पान, सुपारी व दक्षिणा अर्पित करें।
७. आरती एवं पुष्पांजलि
कपूर या घी के दीपक से ‘जय गणेश जय गणेश देवा’ आरती गाएं और हाथ जोड़कर क्षमा प्रार्थना करें।


