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वक्रतुण्ड महाकाय श्लोक — भगवान श्री गणेश

वक्रतुण्ड महाकाय श्लोक

Dedicated to भगवान श्री गणेशहिन्दी (Hindi)

॥ श्री ॥

॥ श्री गणेश श्लोक ॥

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥


शब्दार्थ एवं भावार्थ

  • वक्रतुण्ड: जिनकी सूंड घुमावदार है (अहंकार को मोड़ने वाले)
  • महाकाय: जिनका विराट स्वरूप है
  • सूर्यकोटि समप्रभ: जो करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी हैं
  • निर्विघ्नं कुरु: बिना किसी बाधा के पूर्ण करें
  • मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा: हे प्रभु, मेरे समस्त कार्यों को सदा निर्विघ्न करें।

भावार्थ: हे घुमावदार सूंड वाले, विशालकाय शरीर वाले, करोड़ों सूर्यों के समान अलौकिक तेज से संपन्न देवाधिदेव गणेश! आप कृपा करके मेरे जीवन के सभी कार्यों को सदा-सदा के लिए निर्विघ्न पूर्ण करने की कृपा करें।

॥ इति श्री शुभम् ॥