॥ श्री ॥
॥ वैदिक शान्ति मन्त्र ॥
शुक्ल यजुर्वेद (अध्याय ३६, मंत्र १७)
मूल मंत्र
ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः
पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः।
वनस्पतयः शान्तिर्विश्वेदेवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः
सर्वं शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
सम्पूर्ण भावार्थ
द्युलोक (आकाश मंडल) में शांति हो, अंतरिक्ष में शांति हो, पृथ्वी पर शांति हो, जल में शांति हो, औषधियों में शांति हो, वनस्पतियों में शांति हो, समस्त देवगणों में शांति हो, परब्रह्म में शांति हो, सब कुछ शांतिपूर्ण हो और जो शांति है वह भी शांति को प्राप्त हो। वह परम शांति मेरे अंतःकरण में स्थापित हो।
आधिदैविक, आधिभौतिक और आध्यात्मिक—तीनों तापों की शांति हो।
॥ इति श्री शुभम् ॥


