॥ श्री ॥
॥ पावन महापर्व दीपावली (दीपोत्सव) ॥
कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाया जाने वाला सनातन धर्म का सर्वाधिक दीप्तिमान प्रकाश पर्व।
दीपावली का आध्यात्मिक संदेश
‘दीपावली’ का अर्थ है दीपों की पंक्ति (आवली)। कार्तिक की गहन काली अमावस्या की रात्रि को असंख्य मिट्टी के दीपकों की स्वर्णिम आभा से जगमगा देना ही दीपोत्सव का मूल स्वरूप है। यह केवल बाह्य अंधकार को दूर करने का नहीं, बल्कि अंतरात्मा के अज्ञान, दुर्गुण और प्रमाद रूपी अंधकार को ज्ञान के दिव्य प्रकाश से मिटाने का पावन संदेश है।
पौराणिक कथाएं एवं महत्व
- प्रभु श्री राम का अयोध्या आगमन: रावण का वध कर चौदह वर्षों के वनवास के पश्चात जब मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम, माता जानकी और लक्ष्मण जी सहित अयोध्या लौटे, तब अयोध्यावासियों ने घी के दीपक जलाकर उनका भव्य स्वागत किया था।
- माँ महालक्ष्मी का प्राकट्य: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय कार्तिक अमावस्या के दिन ही क्षीरसागर से माँ लक्ष्मी का दिव्य प्राकट्य हुआ था।
- नरकासुर वध: भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक अत्याचारी राक्षस का वध कर १६,१०० कन्याओं को उसके बंदीगृह से मुक्त कराया था।
पाँच दिवसीय दीपोत्सव का क्रम
- प्रथम दिन (धनतेरस): भगवान धन्वंतरि और कुबेर देव का पूजन, नए बर्तनों व स्वर्ण-रजत की खरीदारी।
- द्वितीय दिन (नरक चतुर्दशी / छोटी दिवाली): यमराज के निमित्त दीपदान और शरीर पर उबटन लगाकर स्नान।
- तृतीय दिन (दीपावली): मुख्य महापर्व, प्रदोष काल में माँ लक्ष्मी, भगवान गणेश व सरस्वती जी का षोडशोपचार पूजन।
- चतुर्थ दिन (गोवर्धन पूजा / अन्नकूट): भगवान श्रीकृष्ण द्वारा इंद्र के मानमर्दन व गोवर्धन पर्वत धारण करने का उत्सव।
- पंचम दिन (भाई दूज / यम द्वितीया): भाई-बहन के पवित्र स्नेह का पर्व, बहनें भाई के माथे पर तिलक लगाकर दीर्घायु की कामना करती हैं।
॥ इति श्री शुभम् ॥


