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Ayodhya Ram Mandir — Chalisa Ghar
कर्पूरगौरं करुणावतारं व रुद्राष्टकम् (शिव स्तुति) — भगवान शिव

कर्पूरगौरं करुणावतारं व रुद्राष्टकम् (शिव स्तुति)

Dedicated to भगवान शिवहिन्दी (Hindi)

॥ श्री ॥

॥ श्री शिव स्तुति ॥

१. कर्पूरगौरं करुणावतारं

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥

भावार्थ: जो कर्पूर के समान धवल गौर वर्ण वाले हैं, करुणा के साक्षात अवतार हैं, संसार के समस्त सारभूत तत्व हैं, और जिनके गले में सर्पों का सुंदर हार है—वे भगवान शिव माता भवानी (पार्वती) सहित मेरे हृदय रूपी कमल में सदा निवास करें, मैं उन्हें बारंबार प्रणाम करता हूँ।


२. नमामीशमीशान (श्री रुद्राष्टकम्)

गोस्वामी तुलसीदास जी विरचित

नमामीशमीशान निर्वाणरूपं विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम्।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम्॥

भावार्थ: हे ईश! हे ईशान! मैं आपको नमन करता हूँ। आप मोक्ष स्वरूप, सर्वसमर्थ, सर्वव्यापी, ब्रह्म और वेदों के मूल स्वरूप हैं। अपने स्वरूप में स्थित, समस्त त्रिगुणों से परे, विकल्प रहित, निष्काम, चिदाकाश और आकाश को ही वस्त्र रूप में धारण करने वाले देवाधिदेव को मैं भजता हूँ।

निराकारमोंकारमूलं तुरीयं गिरा ग्यान गोतीतमीशं गिरीशम्।
करालं महाकाल कालं कृपालं गुणागार संसारपारं नतोऽहम्॥

भावार्थ: आप निराकार हैं, ओंकार के मूल बीज हैं, तुरीयावस्था में स्थित हैं, वाणी, बुद्धि और इंद्रियों की पहुंच से परे हैं। आप हिमालय के स्वामी, काल के भी महाकाल, परम कृपालु, समस्त गुणों के धाम और संसार सागर से पार उतारने वाले हैं—आपको मेरा कोटि-कोटि नमन है।

॥ इति श्री शुभम् ॥