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Ayodhya Ram Mandir — Chalisa Ghar
श्री हनुमान बाहुक — भगवान हनुमान

श्री हनुमान बाहुक

Dedicated to भगवान हनुमानहिन्दी (Hindi)

॥ श्री ॥

॥ श्री हनुमान बाहुक ॥

कलियुग में जब गोस्वामी तुलसीदास जी बाहु (भुजाओं) के असह्य वात-पीड़ा और फोड़ों से ग्रस्त हो गए थे, तब उन्होंने हनुमान जी की कृपा से यह परम चमत्कारी स्तोत्र रचा था।


प्रमुख छंद एवं भावार्थ

छप्पय

सिंधु तरन, सीय-सोच हरन, रावन-दलन,
संजीवन लखन जियावन कपिराज हैं।
अक्षय-कुमार-मारन, लंक-जारन,
बिभीषन-तारन, जग-विदित समाज हैं॥

भावार्थ: जिन्होंने विशाल समुद्र को खेल-खेल में पार कर लिया, माता सीता के शोक का हरण किया, रावण के गर्व को चूर किया और संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी को नया जीवन दिया—वे ही हमारे वानरराज हनुमान जी हैं। जिन्होंने अक्षय कुमार का वध किया, सोने की लंका को जलाकर भस्म किया और विभीषण को प्रभु के चरणों में स्थान दिलाकर उद्धार किया, उनकी कीर्ति समस्त जगत में विख्यात है।


सवैया: रोग निवारण प्रार्थना

बाल समय रबि भक्षि लियो तब, तीनहुं लोक भयो अंधियारों।
ताहि सो त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टारो॥
देवन आनि करी बिनती तब, छाड़ि दियो रबि कष्ट निवारो।
को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥

भावार्थ: हे कपीश्वर! बाल्यकाल में जब आपने सूर्यदेव को मीठा फल समझकर ग्रस लिया था, तब तीनों लोकों में घोर अंधकार छा गया था। जब देवताओं ने आपसे प्रार्थना की, तब आपने सूर्य को मुक्त कर संसार का संकट दूर किया। इस संसार में ऐसा कौन है जो आपके ‘संकटमोचन’ नाम की महिमा को न जानता हो?


पाठ विधि एवं लाभ

  • असाध्य रोगों में: शरीर में किसी भी प्रकार का असाध्य दर्द, जोड़ों का दर्द, गठिया, कैंसर जैसी गंभीर व्याधियों में हनुमान जी के सम्मुख घी का दीपक जलाकर जल का पात्र रखें और बाहुक का पाठ करें। पाठ के बाद वह जल रोगी को पिलाएं।
  • लाभ: शारीरिक क्लेश, भूत-बाधा और ग्रह दोषों का समूल नाश होता है।
॥ इति श्री शुभम् ॥